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| Saturday 11 October, 2008 |
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LOVE OF TIGER
आप ही फ़ैसला करिए कि इस तेंदुए के क़िस्से और फ़ना की कहानी में कितनी समानता है। महाराष्ट्र के मानिकदोह बचाव केंद्र (पुणे जिला) से तीन सप्ताह पहले एक तेंदुआ भाग गया था। यह तेंदुआ अक्सर जंगल से बाहर आकर लोगों पर हमले करता था। (आतंकवादी)। वन अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया और एक पिंजरे में मादा तेंदुए के साथ बंद कर दिया (आमिर- काजोल का मिलन)।
फिर एक दिन पिंजड़े की सफाई करते समय तेंदुआ भाग गया ( आतंकवादी फ़रार)।
तीन सप्ताह बाद वही तेंदुआ जंगल से लौट आया और बिना किसी उकसावे के अपने पिंजड़े में लौट गया। ( प्रेम की जीत, आतंकवादी हीरो सुधर गया, हीरोइन से मिलन)।
इसमें होना है तुझपे फ़ना जैसे तीन-चार गाने और डाल दीजिए और एक नयी फ़ना तैयार हो जाएगी।
तेंदुए जैसे जंगली जानवर की इस तरह स्वेच्छा से पिंजड़े में वापसी की घटना पहले कभी न देखी, न सुनी गयी है। वन अधिकारी हैरान हैं कि यह हुआ कैसे। उनका अंदाज़ है कि यह जानवरों के लिये जोड़े बनाने का मौसम है और जंगल में तेंदुए को कोई मादा तेंदुआ नहीं मिली होगी इसलिये वह लौट आया।
लेकिन यह भी तो हो सकता है कि पिंजड़े से भाग कर तेंदुआ इनसानों पर हमला करने किसी सिनेमाहॉल में पहुंचा हो, वहां फ़ना चल रही हो और फ़िल्म देख कर उसका भी ह्रदय परिवर्तन हो गया हो।
अब आप कहेंगे, ऎसा कैसे हो सकता है?
अरे, जब हमारे यहां फ़ना जैसी अजीबो-ग़रीब फ़िल्म बन सकती है (और हिट हो सकती है) तो क्या तेंदुआ फ़िल्म देख कर वापस नहीं आ सकता?
अपने भारत में कुछ भी हो सकता है।
-DEAR FRIENDS HEAR SOMETHING INTERSTING NEWS OF U READ IT & TELL ME DO U LIKE IT आप ही फ़ैसला करिए कि इस तेंदुए के क़िस्से और फ़ना की कहानी में कितनी समानत
महाराष्ट्र के मानिकदोह बचाव केंद्र (पुणे जिला) से तीन सप्ताह पहले एक तेंदुआ भाग गया था। यह तेंदुआ अक्सर जंगल से बाहर आकर लोगों पर हमले करता था। (आतंकवादी)। वन अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया और एक पिंजरे में मादा तेंदुए के साथ बंद कर दिया (आमिर- काजोल का मिलन)।
फिर एक दिन पिंजड़े की सफाई करते समय तेंदुआ भाग गया ( आतंकवादी फ़रार)।
तीन सप्ताह बाद वही तेंदुआ जंगल से लौट आया और बिना किसी उकसावे के अपने पिंजड़े में लौट गया। ( प्रेम की जीत, आतंकवादी हीरो सुधर गया, हीरोइन से मिलन)।
इसमें होना है तुझपे फ़ना जैसे तीन-चार गाने और डाल दीजिए और एक नयी फ़ना तैयार हो जाएगी।
तेंदुए जैसे जंगली जानवर की इस तरह स्वेच्छा से पिंजड़े में वापसी की घटना पहले कभी न देखी, न सुनी गयी है। वन अधिकारी हैरान हैं कि यह हुआ कैसे। उनका अंदाज़ है कि यह जानवरों के लिये जोड़े बनाने का मौसम है और जंगल में तेंदुए को कोई मादा तेंदुआ नहीं मिली होगी इसलिये वह लौट आया।
लेकिन यह भी तो हो सकता है कि पिंजड़े से भाग कर तेंदुआ इनसानों पर हमला करने किसी सिनेमाहॉल में पहुंचा हो, वहां फ़ना चल रही हो और फ़िल्म देख कर उसका भी ह्रदय परिवर्तन हो गया हो।
अब आप कहेंगे, ऎसा कैसे हो सकता है?
अरे, जब हमारे यहां फ़ना जैसी अजीबो-ग़रीब फ़िल्म बन सकती है (और हिट हो सकती है) तो क्या तेंदुआ फ़िल्म देख कर वापस नहीं आ सकता?
अपने भारत में कुछ भी हो सकता है।
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